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हरिद्वार में संतों ने खेली गोबर की होली, अनोखे अंदाज में दिया परंपरा और आस्था का संदेश

Haridwar News : फाल्गुन मास, रंगों और मस्ती का महीना। देशभर में कहीं बरसाना की लठमार होली तो कहीं मथुरा की फूलों की होली की धूम है। धर्म नगरी हरिद्वार में भी होली की धूम देखने के लिए मिल रही है।

हरिद्वार में संतों ने खेली गोबर की होली

रंगएकादशी के बाद हर तरफ रंग और उमंग का उत्सव देखने को मिल रहा है। लोग अबीर और गुलाल से होली खेल रहे हैं। धर्मनगरी हरिद्वार के जूना अखाड़ा में संतों ने अनोखे अंदाज में रंगों और गाय के गोबर से होली खेलकर परंपरा और आस्था का संदेश दिया।

अनोखे अंदाज में दिया परंपरा और आस्था का संदेश

हरिद्वार के जूना अखाड़ा स्थित माया देवी मंदिर प्रांगण में निरंजनी अखाड़ा और जूना अखाड़ा के संतों ने शुक्रवार को पारंपरिक रंगों के साथ-साथ गाय के गोबर से होली खेली। संतों ने एक-दूसरे को रंग और गोबर लगाकर शुभकामनाएं दीं तथा भजन-कीर्तन के बीच उत्सव मनाया।

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इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि गोबर होली हमारी सनातन परंपरा का प्रतीक है। गाय को हिंदू धर्म में माता का दर्जा दिया गया है और उसका गोबर भी पवित्र माना जाता है। यह प्रकृति के प्रति सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति की विशिष्टता का संदेश देता है।

गोबर की होली

होली का पर्व संत समाज को एक सूत्र में पिरोने का करता है कार्य

स्वामी हरिगिरि महाराज, महामंत्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, हरिद्वार ने कहा कि होली का पर्व संत समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। गोबर होली के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया जा रहा है कि हमें अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहना चाहिए। प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीना चाहिए। संत समाज ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे होली को प्रेम, सौहार्द और मर्यादा के साथ मनाएं।

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