उत्तराखंडदेहरादून

फायर सीजन के लिए तैयारियों में जुटा वन विभाग, जंगलों को आग से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ हुई बैठक

Forest Fire : उत्तराखंड में हर साल जंगलों की आग तांडव मचाती है। कई लोगों और जानवरों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। जंगलों की आग से होने वाले नुकसान से बचने के लिए वन विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।

फायर सीजन के लिए तैयारियों में जुटा वन विभाग

प्रदेश में हर साल गर्मियों में लगातार आग की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसमें कई लोगों के साथ जीव जंतुओ की भी मौत भी हो जाती है। ऐसे में वनाग्नि की घटनाओं पर रोकथाम के लिए उत्तराखंड वन विभाग ने विभिन्न विभागों के साथ बैठक की। ये बैठक राज्य में वनाग्नि की बढ़ती चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने तथा विभिन्न विभागों के मध्य समन्वित कार्यप्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

जंगलों को आग से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ हुई बैठक

जंगलों को आग से बचाने के लिए विभिन्न विभागों के साथ हुई बैठक के दौरान मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। जिसमें उत्तराखंड में वनाग्नि की वर्तमान स्थिति, संवेदनशील क्षेत्र, जोखिम मानचित्रण तथा पूर्व वर्षों के अनुभवों पर प्रकाश डाला गया।

Forest Fire

वनाग्नि को रोकने और जनहानि कम करने पर हुई चर्चा

प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्रा ने बताया की इस बैठक में उत्तराखंड वन विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सूचना विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), वन सर्वेक्षण भारत (FSI), भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE), वन अनुसंधान संस्थान (FRI), यूकॉस्ट (UCOST), यूरेडा (UREDA), सूचना विभाग रेड क्रॉस सोसाइटी, शिक्षा विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक का उदेश्य राज्य में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने और जन हानि को कम करने पर विस्तृत चर्चा हुई।

इसके साथ ही बैठक में विभिन्न विभागों की भूमिका और उत्तरदायित्व मानक तैयार करने पर भी चर्चा की गई। जिसमें संसाधनों के साझा उपयोग, आपदा की स्थिति में त्वरित समन्वय, कानून व्यवस्था बनाए रखने, राहत और पुनर्वास कार्यों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

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