उत्तराखंडदेहरादून

डोईवाला में मसाला यूनिट ने बदली महिलाओं की किस्मत, 30 लाख का टर्नओवर, 700 को मिल रहा रोजगार

Doiwala News : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं अब केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सशक्त मिसाल बन रही हैं। इसका सटीक उदाहरण राजधानी देहरादून के डोईवाला ब्लॉक में देखने को मिल रहा है, जहाँ ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित मसाला यूनिट न केवल स्वरोज़गार का माध्यम बनी है, बल्कि हिलान्स ब्रांड के अंतर्गत आधुनिक पैकेजिंग और प्रभावी मार्केटिंग के साथ नए आयाम स्थापित कर रही है।

डोईवाला में मसाला यूनिट ने बदली महिलाओं की किस्मत

डोईवाला ब्लॉक के दूधली गांव में सफलता मॉडल क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी महिलाओं ने ग्रामोत्थान रीप परियोजना के अंतर्गत मसाला यूनिट की स्थापना कर आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कदम बढ़ाया है। वर्ष 2023 में स्थापित इस यूनिट ने अब तक लगभग 30 लाख रुपए का कारोबार किया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यूनिट ने 10 लाख रुपए, जबकि वर्ष 2024-25 में 20 लाख रुपये का टर्नओवर दर्ज किया है।

30 लाख के टर्नओवर के साथ 700 को मिल रहा रोजगार

मसाला यूनिट में चार महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से मसालों के निर्माण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग का कार्य कर रही हैं। जबकि 45 महिलाएं विभिन्न स्थानों से मसालों का कच्चा माल एकत्र कर यूनिट तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, फेडरेशन से जुड़ी 700 से अधिक महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों से हल्दी, मिर्च, धनिया और अन्य मसालों का कच्चा माल उपलब्ध करा रही हैं।

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वर्ष 2023 में रीप परियोजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये की लागत से इस मसाला यूनिट की शुरुआत की गई थी। इसमें 6 लाख रुपये ग्रामोत्थान रीप परियोजना, 3 लाख रुपए बैंक ऋण तथा 1 लाख रुपये फेडरेशन की महिलाओं द्वारा स्वयं के योगदान के रूप में निवेश किया गया।

शुद्धता, स्वच्छता और आधुनिक तकनीक मसाले हो रहे तैयार

सफलता मॉडल क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा संचालित इस मसाला यूनिट में अत्याधुनिक मशीनों के माध्यम से हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, जीरा और बेसन का निर्माण किया जाता है। तैयार मसालों को हिलान्स ब्रांड की आकर्षक और आधुनिक पैकेजिंग के साथ बाज़ार में उतारा जाता है। महिलाओं को मशीनों के संचालन के साथ-साथ पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

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बढ़ती मांग को देखते हुए समूह की महिलाएं अब गरम मसाला, चिकन मसाला, फिश करी मसाला, मैगी मसाला सहित अन्य नई किस्मों के विकास पर भी कार्य कर रही हैं। शुद्धता, स्वच्छता और आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किए जा रहे ये मसाले स्थानीय बाज़ार में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।

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