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पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खुली पोल, अस्पताल बनाता रहा बहाने, माँ-बच्चे की मौत

SRINAGAR: समय पर एम्बुलेंस न मिलने पर गई गर्भवती माँ ओर बच्चे की जान

श्रीनगर (SRINAGAR): उत्तराखंड में बदहाल स्वास्थय व्यवस्था की एक बार फिर से पोल खुल गई है . एक गंभीर मामला श्रीनगर गढ़वाल से सामने आया है, जहां समय पर एम्बुलेंस न मिलने से एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की जान चली गई.

श्रीनगर में समय पर एम्बुलेंस न मिलने से जच्चा-बच्चा की मौत

दरअसल, बुधवार शाम करीब सात बजे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में कार्यरत विनोद की 31 वर्षीय पत्नी शिखा घर पर खाना बना रही थीं. इसी दौरान वो अचानक गिर पड़ीं और तेज रक्तस्राव होने लगा. पड़ोसी दुकानदार शीशपाल भंडारी ने चीख-पुकार सुनकर उन्हें लहूलुहान हालत में देखा और तत्काल निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी पहुंचाया.

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घटना ने खोली बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

इस बीच 108 एम्बुलेंस सेवा को भी सूचना दी गई थी. स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर डॉक्टरों ने शिखा की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया. लेकिन, विडंबना ये रही कि अस्पताल परिसर में खड़ी एम्बुलेंस को ये कहकर नहीं भेजा गया कि चालक छुट्टी पर है और वाहन का स्टेयरिंग खराब है, जबकि एक स्थानीय व्यक्ति ने स्वयं वाहन चलाने की पेशकश भी की.

हॉस्पिटल ले जाते समय तोड़ा दम

करीब दो घंटे बाद रात नौ बजे 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे. श्रीनगर ले जाते समय रास्ते में ही शिखा और उनके 32 सप्ताह के अजन्मे बच्चे की मौत हो गई. ये घटना पहाड़ों में आपात स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां देरी और अव्यवस्था जानलेवा साबित हो रही है.

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