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चेतावनी: बड़े भूकंप का खतरा, नहीं चेते तो करोड़ों जिंदगियां होंगी तबाह

SattaSamvad by SattaSamvad
September 25, 2023
in देश-विदेश, राजनीति, संपादकीय
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चेतावनी: बड़े भूकंप का खतरा, नहीं चेते तो करोड़ों जिंदगियां होंगी तबाह
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Warning: वाडिया हिमालय भू -विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों का ताजा शोध बताता है कि हिमालय की तलहटी में धरती को चीर देने वाले भूकंप भी पहले आ चुके हैं। हरिद्वार के पास लालडांग में कम से कम दो बार वर्ष 1344 और 1505 में आठ से ज्यादा मेग्नीट्यूड के भूकंप आने के सबूत मिलते हैं, जिससे एक इलाके में जमीन 13 मीटर ऊपर उठ गई थी। लाल डांग से लेकर रामनगर, टनकपुर और नेपाल तक जमीन पर करीब 200 किलोमीटर लंबी दरार पड़ गई थी। तब अनगिनत लोग और घर इस भूकंप की भेंट चढ़े होंगे। हरिद्वार से नेपाल तक धरती पर पड़ी दरार के कारण प्राकृतिक रूप में विशेषकर जल स्रोतों में बड़ा बदलाव हुआ होगा। क्या उस तरह के भयावह भूकंप भविष्य में भी आ सकते हैं? तब से अब तक करीब एक हजार साल में जनसंख्या काफी बढ़ चुकी है। पिछले 9 सालों में तो अंधाधुंध निर्माण हुए हैं। बहुमंजिला इमारत का प्रचलन बड़ा है। अब यदि 13वीं सदी जैसा शक्तिशाली भूकंप आया तो स्वाभाविक रूप से जनहानि कई गुना अधिक होगी, त्रासदी का अनुमान लगाना भी कठिन है। क्या वैसी बड़ी आपदा का सामना करने के लिए हम तैयार हैं?

भूकंप कब कहां और कितनी तीव्रता का आएगा इसके पूर्वानुमान की तकनीक अभी तक उपलब्ध नहीं है। भू – वैज्ञानिकों ने भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों की शिनाख्त अवश्य की है। भारत को चार जोन में बांटा गया है। सबसे कम खतरे वाला इलाका जोन – दो कहलाता है। इसमें दक्षिण भारत आता है। जोन – 3 में मध्य भारत को रखा गया है। जोन चार तुलनात्मक रूप से ज्यादा खतरनाक है, जिसमें उत्तर प्रदेश का ज्यादातर क्षेत्र उत्तराखंड का निचला हिस्सा और दिल्ली शामिल है। सबसे खतरनाक जोन – 5 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड आते हैं। बीते सवा सौ साल के इतिहास पर नजर डालने से पता चलता है कि भारत में सबसे शक्तिशाली पांच में से चार भूकंप हिमालय या उसकी तलहटी से सटे राज्य में आए। उत्तर भारत अत्यंत संवेदनशील है, पर पांचवा बड़ा विनाशकारी भूकंप गुजरात के भुज में आने का मतलब है कि देश का पश्चिमी इलाका भी खतरे की जद में है। लिहाजा पूरे देश को ध्यान में रखते हुए हमें योजनाएं बनानी होगी। लोगों की आवासीय जरूरत को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर घरों का निर्माण हो रहा है। स्कूल, अस्पताल, फ्लाईओवर, सुरंग समेत अनेक परियोजनाएं निरंतर बना रही हैं। ऐसे में 13वीं और 15वीं शताब्दी के भयावह भूकंप का वैज्ञानिक खुलासा जनता और सरकार दोनों के लिए सबक होना चाहिए।

सड़कों के निर्माण के लिए बेतरतीब तरीके से पहाड़ काटे जा रहे हैं। कई जगह उनमें सुरंगे भी बनाई जा रही हैं। पहाड़ों पर चार-पांच मंजिला तक निर्माण अब आम हो चुके हैं। पर उन में भूकंप रोधी उपाय नहीं किया जा रहे हैं। प्राकृतिक आपदा के वक्त एक भवन गिरने का असर दूसरे पर और दूसरे का असर तीसरे पर आता है और एक के बाद एक मकान जमीदोज होते चले जाते हैं। इसी तरह मैदानी इलाकों में बनाई जा रही गगनचुंबी इमारतें यदि भूकंप रोधी क्षमता वाली नहीं होगी तो बड़े भूकंप की स्थिति में त्रासदी भयानक साबित हो सकती है। इसलिए लगातार भूकंप का सामना करने वाले जापान जैसे देशों से सीखा जा सकता है कि वहां जान माल की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती हैं। अगर सीखना नहीं है तो फिर हमें खामियाजा भुगतने को तैयार रहना होगा।

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