पहले प्रयास में सफलता का परचम लहराया
उत्तराखंड के देहरादून जनपद की बेटी शिल्पा चौहान ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा 2024 में प्रथम प्रयास में ही सफलता हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है। शिल्पा ने ऑल इंडिया स्तर पर 188वीं रैंक प्राप्त की है और अब वह जौनसार बावर क्षेत्र की पहली महिला IAS अधिकारी बनने जा रही हैं। यह न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि पूरे उत्तराखंड विशेषकर जौनसार क्षेत्र के लिए भी एक प्रेरणादायक उपलब्धि है।
गांव की बेटी ने बढ़ाया क्षेत्र का मान
23 वर्षीय शिल्पा चौहान देहरादून जिले के त्यूनी तहसील क्षेत्र के शेडिया गांव की मूल निवासी हैं। पहाड़ी क्षेत्र की एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली शिल्पा ने यह दिखा दिया है कि मेहनत, समर्पण और सही मार्गदर्शन से कोई भी बड़ा सपना साकार किया जा सकता है। शिल्पा की सफलता से उनके गांव सहित पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। जौनसार-बावर जैसी पिछड़ी मानी जाने वाली घाटी से पहली महिला IAS अधिकारी बनना वास्तव में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
भारतीय सेना में हैं शिल्पा के पिता
शिल्पा चौहान के पिता श्री राजेंद्र सिंह चौहान भारतीय सेना में सेवारत हैं और वर्तमान में दिल्ली में तैनात हैं। उनकी माता श्रीमती संगीता चौहान एक गृहणी हैं। बेटी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर माता-पिता बेहद भावुक और गर्वित हैं। परिवार ने बताया कि शिल्पा शुरू से ही पढ़ाई में तेज रही हैं और उनका सपना था कि वह प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज में बदलाव लाएं।
शेडिया से दिल्ली तक का प्रेरणादायक सफर
शिल्पा की प्रारंभिक शिक्षा शेडिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में हुई। इसके बाद उन्होंने नवोदय विद्यालय की परीक्षा पास कर ठियोग व बिलासपुर के स्कूलों से कक्षा 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। स्नातक की शिक्षा उन्होंने देहरादून के डीएवी कॉलेज से प्राप्त की। इसके बाद UPSC की तैयारी के लिए शिल्पा दिल्ली चली गईं, जहां उन्होंने एक साल तक कोचिंग ली। अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने वह कर दिखाया जो लाखों अभ्यर्थी कई वर्षों तक प्रयास करके भी नहीं कर पाते।
कड़ी मेहनत और अनुशासन बना सफलता की कुंजी
शिल्पा ने बताया कि UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए नियमित पढ़ाई, समय का प्रबंधन और मानसिक दृढ़ता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और हर दिन की प्लानिंग कर पढ़ाई की। शिल्पा का मानना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो रास्ता खुद बनता चला जाता है।
जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने दी बधाई
शिल्पा की सफलता पर क्षेत्रीय विधायक प्रीतम सिंह, विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान समेत कई जनप्रतिनिधियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। साथ ही गांव और आस-पास के लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। हर कोई शिल्पा को अपने बच्चों के लिए प्रेरणा मान रहा है।
अब लड़कियों के लिए बनीं मिसाल
शिल्पा चौहान की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत जीत है बल्कि वह क्षेत्र की सभी बेटियों के लिए एक मजबूत संदेश है कि वे भी किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। शिल्पा का मानना है कि बेटियों को भी समान अवसर और समर्थन मिलना चाहिए ताकि वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।
आगे की योजना और उद्देश्य
शिल्पा का लक्ष्य एक संवेदनशील और जनसेवक IAS अधिकारी बनने का है। उन्होंने कहा कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देंगी। उनका सपना है कि वह अपने अनुभव और ऊर्जा का इस्तेमाल करके समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचा सकें।
संघर्ष की कहानी, सफलता की मिसाल
शिल्पा की यह यात्रा एक उदाहरण है कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती, अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो। आज की तारीख में जब युवा दिशा की तलाश में भटकते हैं, शिल्पा जैसी कहानियां उन्हें सही राह दिखाने का काम करती हैं।
बेटी ने रचा इतिहास
शिल्पा चौहान की सफलता उत्तराखंड और विशेषकर जौनसार बावर के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने दिखा दिया कि पहाड़ की बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं। शिल्पा की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनेगी और उम्मीद है कि और भी बेटियां उनसे प्रेरणा लेकर अपने सपनों की उड़ान भरेंगी।










