देहरादून: सोशल मीडिया पर एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में स्थानीय लोग मंत्री संबोधित करके बात कर रहे हैं। इस ऑडियो में विधायक का जिक्र भी साफ तौर पर सुना जा सकता है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि, यह वायरल ऑडियो भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा और वन मंत्री सुबोध उनियाल के बिच्बकी बातचीत की क्लिप है। इस ऑडियो में स्थानीय लोग वन्य जीव संघर्ष से परेशान मंत्री से बात करते हुए सुनाई दे रहे हैं। विधायक भी इसी बात का जिक्र करते हुए सुनाई दे रहे हैं। इस वीडियो में खास बात यह है कि मंत्री हाई कोर्ट को गाली देते हुए सुनाई दे रहे हैं। साथ ही जिस व्यक्ति ने पीआईएल दाखिल की है उसको भी मारने पीटने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि यह ऑडियो तब का है जब भीमताल क्षेत्र में एक आदमखोर ने एक के बाद एक तीन घटनाओं को अंजाम दिया। इसी से परेशान होकर लोग वन मंत्री से बात कर रहे हैं। हालांकि सत्ता संवाद इस वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करता कि किन लोगों के बीच यह बातचीत हो रही है और यह वॉइस किसकी है।
वायरल ऑडियो पर सियासत।
इस ऑडियो पर सियासत भी जमकर हो रही है। कांग्रेस प्रदेश पर अध्यक्ष करन माहरा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि बकौल भीमताल विधायक वह जिस व्यक्ति से बात कर रहे हैं वह उत्तराखंड सरकार में मंत्री हैं पर मंत्री कॉल पर होने से इनकार कर चुके हैं ( यानी मंत्री ने साफ कहा कि यह ऑडियो मेरा नहीं है)। कहा कि ऐसे में उत्तराखंड सरकार और भाजपा संगठन अपने विधायक कैड़ा से पूछें की उनके साथ फोन पर कौन व्यक्ति था जिसे वह वन मंत्री बताकर स्थानीय जनता को भ्रमित कर रहे हैं।

महारा ने कहा की यदि कैड़ा की बात में सच्चाई है तो वाकई स्थिति खेदजनक है। सार्वजनिक क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों को इस तरह की भाषा शैली किसी सूरत में शोभा नहीं देती। जो वीडियो और ऑडियो वायरल हो रहा है उसमें बीजेपी के एक विधायक और मंत्री की आपसी बातचीत सुनाई दे रही है। जिसमें भाजपा विधायक वन्य जीव और मानव संघर्ष में हुए नुकसान को लेकर मंत्री से दिशा निर्देश और मदद की दरकार कर रहे हैं।
महारा ने कहा कि बातचीत बहुत ही निंदनीय है और उसमें दूसरा व्यक्ति उच्च न्यायालय के संबंध में बहुत ही अभद्र भाषा में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए सुना जा सकता है। इतना ही नहीं बातचीत के दौरान वह व्यक्ति पी आई एल करने वाले को भी पकड़ने की और मारने की बात भाजपा विधायक से कर रहा है जो की बहुत ही निंदनीय है। महारा ने कहा की सरकार का दोहरा चरित्र इसी बात से सामने आ जाता है कि पिछले दिनों l उद्यान विभाग में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ जिसमे भाजपा विधायक और बड़े अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई और उच्च न्यायालय ने पूरे मामले की सीबीआई जांच करने के आदेश दिए। महारा ने कहा की अपने विधायक और अधिकारियों को फंसता देख धामी सरकार उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी और वन्य जीव और मानव संघर्ष जैसे गंभीर प्रकरण जिससे उत्तराखंड का समूचा पर्वतीय अंचल आतंकित है ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर या उसकी आड़ लेकर वन मंत्री अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। महारा ने कहा की एक जनप्रतिनिधि को इस तरह की भाषा शैली कतई शोभा नहीं देती और यदि राम सिंह कैड़ा से बात करने वाले दूसरे व्यक्ति वन मंत्री है यह बात सत्यापित हो जाती है तो मंत्री महोदय मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल का हिस्सा है ऐसे में मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत हस्तक्षेप करके मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मंगवानी चाहिए और माननीय उच्च न्यायालय को स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि इस तरह के प्रकरणों की पुनरावृत्ति ना हो।
कांग्रेस प्रदेश मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने बयान किया जारी











