देहरादून: उत्तराखंड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल जिताऊ चेहरों की तलाश में जुट गए हैं और इसी कड़ी में यमुनोत्री विधानसभा से निर्दलीय विधायक संजय डोभाल प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।
कांग्रेस और बीजेपी की नजर संजय डोभाल पर
यमुनोत्री से विधायक संजय डोभाल का दावा है कि प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेता उनसे लगातार संपर्क कर रहे हैं। दोनों ही दल उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर आगामी विधानसभा चुनाव मैदान में उतारना चाहते हैं।
फैसला जनता के हाथ में: MLA
इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बीच संजय डोभाल का कहना है कि वे कोई भी निर्णय जल्दबाजी में नहीं लेंगे। उनके अनुसार, यमुनोत्री विधानसभा की जनता जो चाहेगी, वही उनका अंतिम फैसला होगा।
बीजेपी और कांग्रेस, दोनों से चल रही बातचीत
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि संजय डोभाल बीजेपी के एक गुट के काफी करीब हैं और उनके साथ संवाद जारी है। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी के दरवाजे उनके लिए खुले हुए हैं। वहीं दूसरी ओर, उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें भी कम नहीं हैं। हाल ही में बड़कोट में आयोजित रवाई महोत्सव के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह के साथ उनकी मौजूदगी ने इन चर्चाओं को और हवा दी है।
राजनीति में न दोस्त होता है, न दुश्मन!
इन तमाम कयासों पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय डोभाल ने कहा कि राजनीति में न कोई स्थायी दोस्त होता है और न ही दुश्मन। उन्होंने साफ किया कि भविष्य में क्या होगा, यह अभी तय नहीं है और निर्णय समय आने पर लिया जाएगा।

2027 में निर्दलीय नहीं, पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के संकेत
संजय डोभाल के बयानों से यह संकेत जरूर मिल रहे हैं कि वे 2027 का विधानसभा चुनाव निर्दल नहीं लड़ेंगे। संभावना है कि वे किसी एक राष्ट्रीय पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुनावी रण में उतरेंगे। फिलहाल उनके समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संजय डोभाल आखिर किस पार्टी का दामन थामते हैं।










