देहरादून: गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने संबंधी पूर्व सीएम हरीश रावत के बयान से सियासी हलकों में चर्चा का बाजार गर्म होता दिखाई दे रहा है। हरीश रावत के बयान पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने तीखा प्रहार किया।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यदि 2016 में उनकी सरकार नहीं गिरती तो गैरसैंण अस्थाई राजधानी बन गई होती और इसके गुनहगार 2016 के सरकार गिराने वाले महापापी बल्द (बैल) है।
हरीश रावत के बयान पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने पलटवार किया है। सुबोध उनियाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत झूठ बोलने की चलती फिरती मशीन है, उन्होंने कहा कि हरीश रावत पर अब उम्र का असर साफ दिखाई दे रहा है और उन्हें संन्यास ले लेना चाहिए। कहा कि हमारे पार्टी से अलग होने के 1 साल बाद तक हरीश रावत मुख्यमंत्री रहे यदि वह चाहते तो उसके बाद भी निर्णय ले सकते थे।
इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फिर पलटवार किया है। हरीश रावत ने कहा कि जिस तरह से हमारी सरकार गैरसैंण में विकास के कार्यों को तबज्जो दे रही थी, विधानसभा भवन बना दिया गया था, चार डिवीजन खड़ी कर दी थी और टाउनशिप की प्लानिंग कर दी थी, सड़के बना दी गई थी, हेलीपैड भी बना दिया गया था, साथ ही चौखुटिया को मिलाकर विकास बोर्ड बना दिया गया था। जिला बनाने की प्लानिंग कर दी गई थी सचिवालय बनाने के लिए 57 करोड़ का प्रावधान करके एक संस्था को टेंडर भी दिया गया था, साथ ही 500 आवासीय भवनों के प्रोजेक्ट को मंजूर कर दिया था। यदि सरकार को अस्थिर ना किया होता तो गैरसैंण स्थाई राजधानी बन जाती। सरकार गिराने के बाद जो एक साल का समय उन्हें मिला उसमे 7 महीने सरकार अस्थिरता में रही। उसके बाद आचार संहिता लग गई। जो वित्त बजट विधानसभा से पास हुआ उसे तात्कालिक राज्यपाल ने इसलिए दबाए रखा की केंद्र सरकार उन्हें मिजोरम भेजना चाहती थी और वह नहीं जाना चाहते इसलिए उन्होंने उस वित्तीय बजट पर अनुमोदन नहीं दिया। आगे उन्होंने कहा कि गैरसैंण का मामला जो रिजॉल्व नहीं हो पाया उसका पूरा दोष 2016 के गुनहगारों के ऊपर है। और उत्तराखंड को उनसे हिसाब लेना चाहिए। यदि उनसे हिसाब नहीं लिया तो उत्तराखंड पछताएगा। कहा कि मुझे उत्तराखंड ने बहुत कुछ दिया है।











