देहरादून। हर साल वन विभाग के लिए चुनौती बनने वाली वनाग्नि को लेकर इस बार विभाग पहले से कहीं अधिक मुस्तैद नजर आ रहा है। फॉरेस्ट फायर सीजन से पहले ही विभाग ने व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं।
1438 क्रू स्टेशन, स्टाफ की तैनाती पूरी
मुख्य वन संरक्षक सुशांत कुमार पटनायक ने जानकारी दी कि प्रदेश भर में कुल 1438 फायर क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। सभी संवेदनशील क्षेत्रों में स्टाफ की तैनाती कर दी गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

फायर वाउचर का होगा इंश्योरेंस
वनाग्नि नियंत्रण में लगे कर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फायर वाउचर को लेकर नई प्लानिंग की जा रही है। इसके तहत फायर वाउचरों का इंश्योरेंस सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।
13 हजार किलोमीटर फायर लाइन की सफाई
प्रदेश में मौजूद लगभग 13 हजार किलोमीटर लंबी फायर लाइनों की नियमित साफ-सफाई कराई जा रही है। साथ ही समुदाय वन पंचायतों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर भी आग पर काबू पाया जा सके।
चिड़ पीरुल एकत्रीकरण पर जोर
वनाग्नि की मुख्य वजह बनने वाले चिड़ पीरुल के एकत्रीकरण का कार्य लंबे समय से जारी है। इससे जंगलों में आग लगने की घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इंटर एजेंसी कोऑर्डिनेशन से मजबूत होगी व्यवस्था
सीमित संसाधनों और समय की कमी को देखते हुए वन विभाग ने इंटर एजेंसी कोऑर्डिनेशन को प्राथमिकता दी है। इसी के तहत 1 फरवरी को FRI परिसर में अहम बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें उत्तराखंड पुलिस, SDRF, NDRF और आपदा प्रबंधन विभाग को आमंत्रित किया गया है।
13 फरवरी को प्रदेशव्यापी मॉक ड्रिल
फायर सीजन से पहले तैयारियों को परखने के लिए 13 फरवरी को पूरे प्रदेश में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, ताकि वास्तविक स्थिति में सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जा सके।
15 फरवरी से 30 जून तक फॉरेस्ट फायर सीजन
गौरतलब है कि उत्तराखंड में 15 फरवरी से 30 जून तक फॉरेस्ट फायर सीजन माना जाता है। वन विभाग की यह तैयारियां आने वाले महीनों में जंगलों को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएंगी।
