बद्रीनाथ: विश्वप्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट आज रविवार, 4 मई को बैशाख शुक्ल सप्तमी, पुष्य नक्षत्र में प्रातः 6 बजे वैदिक मंत्रोच्चार, सेना की गढ़वाल स्काउट रेजीमेंट के बैंड की भक्तिमय धुनों और “जय बदरीविशाल” के उद्घोष के साथ श्रद्धालुओं के लिए विधिवत खोल दिए गए।
इस पावन अवसर पर श्री बदरीनाथ मंदिर को 40 क्विंटल से अधिक फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। मंदिर परिसर में सेना, आईटीबीपी तथा दानदाता श्रद्धालुओं द्वारा भंडारे आयोजित किए गए। सीमांत गांव माणा और बामणी की महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य एवं भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान हेलीकाॅप्टर से फूलों की वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।
मुख्य द्वार पर वेदवेदांग संस्कृत विद्यालय, जोशीमठ के छात्रों ने स्वस्तिवाचन कर शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित 15 हज़ार से अधिक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर देश-विदेश के तीर्थयात्रियों को चारधाम यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं और आने का आमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष यात्रा नये कीर्तिमान स्थापित करेगी और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं हेतु सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने प्रदेश व देश की समृद्धि और खुशहाली की कामना भी की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से श्री बदरीनाथ मंदिर में प्रथम महाभिषेक पूजा बीकेटीसी द्वारा करायी जाएगी।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि अब तक 25 लाख के करीब तीर्थयात्री चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण करवा चुके हैं, जो बड़ी संख्या को दर्शाता है।
नवनियुक्त मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यात्रियों के लिए बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया गया है और समिति तीर्थयात्रियों के हित में कार्य करेगी।
कपाट खुलने की प्रक्रिया में सुबह चार बजे से मंदिर समिति के अधिकारी और कर्मचारी सक्रिय हो गए थे। पाँच बजे रावल अमरनाथ नंबूदरी, वरिष्ठ अधिकारीगण एवं स्थानीय धर्माधिकारी मंदिर परिसर पहुंचे और साढ़े पाँच बजे द्वार पूजा आरंभ हुई। ठीक छह बजे, भगवान बदरीविशाल के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए।
इससे पूर्व माता लक्ष्मी ने मंदिर परिसर से अपने मंदिर में प्रवेश किया तथा श्री कुबेर, उद्धव जी, गरुड़ जी गर्भगृह में प्रतिष्ठित हुए। घृत कंबल हटाए जाने के बाद श्रद्धालुओं को भगवान बदरीविशाल के निर्वाण दर्शन प्राप्त हुए।










