देहरादून: राज्यपाल ने उत्तराखंड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश 2025 को मंजूरी दे दी है। अब उत्तराखंड में हरिद्वार जिले को छोड़कर शेष 12 जिलों में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में दो बच्चों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। इसको लेकर सरकार की ओर से कट ऑफ डेट जारी कर दी गई है। इसके अनुसार 25 जुलाई 2019 से पहले जिनकी दो से अधिक संताने हैं, वह चुनाव लड़ सकेंगे। जबकि इस तिथि के बाद जिनकी दो से अधिक संताने होगी वह चुनाव में अपनी किस्मत नहीं आजमा सकेंगे।
राज्यपाल के अध्यादेश को मंजूरी के साथ ही विदाई एवं संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव धनंजय चतुर्वेदी की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब सरकार पंचायत चुनाव को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। बता दें कि इससे पहले उत्तराखंड पंचायत राज एक्ट 2016 में संशोधन के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विचलन (विशेष अधिकार) से मंजूरी दे दी। जिसे बाद में राज भवन की मंजूरी के लिए भेजा गया था। अब एकल सदस्य समर्पित आयोग की सिफारिश के अनुसार पंचायतों में ओबीसी आरक्षण लागू किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आयोग की ओर से आरक्षण को लेकर पहले ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है, जिस पर अब मुख्यमंत्री अपना अनुमोदन देंगे। फिलहाल इसी पंचायतों में प्रशासक नियुक्त हैं जिनका कार्यकाल इसी माह खत्म हो रहा है। ऐसे में सरकार प्रशासकों का कार्यकाल 3 से 6 माह के लिए बढ़ा सकती है।
हाईकोर्ट ने 20 तक मांगा पंचायत चुनाव का कार्यक्रम
उधर नैनीताल हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि पंचायत चुनाव कब तक कराया जा सकते हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को 20 मई को इसका कार्यक्रम प्रस्तुत करने का आदेश दिया है इसी दिन मामले की अगली सुनवाई भी होगी। सरकार 20 मई को हाई कोर्ट में क्या जवाब दाखिल करती है उससे यह तय हो जाएगा कि सरकार जल्द ही चुनाव करवाने के पक्ष में है या फिर 3 से 6 मा और लग सकते हैं।
