हरिद्वार। हरिद्वार जनपद के खानपुर रेन्ज में वन संपदा के दोहन को लेकर वन विभाग पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ढाक के पेड़ों से अवैध रूप से गोंद (राल) निकासी का एक वीडियो सोशल मीडिया और पत्रकारों के बीच वायरल होने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के एक जागरूक ग्रामीण मुसर्रफ पुत्र अब्दुल वाहिद ने जंगल में हो रही कथित अवैध राल निकासी को अपनी जान जोखिम में डालकर रिकॉर्ड किया। वीडियो और तस्वीरों में ढाक के जीवित पेड़ों पर कट के स्पष्ट निशान, पेड़ों के नीचे बिछी पॉलिथीन शीट और उस पर जमा राल दिखाई दे रही है, जो इस बात की ओर इशारा करती है कि यह गतिविधि योजनाबद्ध तरीके से की जा रही थी।

ग्रामीण का आरोप है कि यह कार्य बिना किसी वैध अनुमति के किया जा रहा था और इसमें वनकर्मियों की मिलीभगत की आशंका है। बताया जा रहा है कि यदि यह कार्य अधिकृत होता, तो मौके पर विभागीय चिन्ह, अनुमति संबंधी सूचना या निगरानी व्यवस्था मौजूद होती।
मामला जब एसडीओ वन ज्वाला प्रसाद के संज्ञान में आया, तो उन्होंने जांच के आदेश दिए। हालांकि, जांच की जिम्मेदारी खानपुर रेन्ज के ही वनक्षेत्राधिकारी को सौंपे जाने पर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि क्षेत्र में तैनात अधिकारियों की भूमिका पहले से ही संदेह के घेरे में है, ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कम है।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध राल निकासी न केवल वन कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि इससे पेड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचता है और जंगल की जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नियमों के अनुसार, गोंद या राल निकालने के लिए वन विभाग से पूर्व अनुमति, निर्धारित तकनीकी विधि और तय सीज़न का पालन अनिवार्य होता है।
सूत्रों के अनुसार, एसडीओ वन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसओजी या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि वन संपदा की लूट पर प्रभावी रोक लग सके।










