जिला पंचायत सदस्य वीना चौहान ने कृषि मंत्री को लिखा पत्र, उठाए गंभीर सवाल
देहरादून। उत्तरकाशी जनपद के नौगांव ब्लॉक अंतर्गत जिला पंचायत वार्ड कुथनौर की जिला पंचायत सदस्य बिना चौहान ने प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी को पत्र लिखकर आलू फसल बीमा योजना में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आपदा से पूरी तरह नष्ट हुई आलू की फसल के बावजूद किसानों को बीमा क्लेम के नाम पर केवल जमा की गई प्रीमियम राशि ही लौटाई गई, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की आर्थिक राहत नहीं मिल सकी।

आपदा आई, फसल बर्बाद हुई, फिर क्लेम क्यों नहीं?
पत्र में जिला पंचायत सदस्य ने लिखा कि किसानों द्वारा योजना के नियमों के तहत विगत वर्ष आलू फसल का बीमा प्रीमियम समय पर जमा किया गया था। इसके बावजूद जब आपदा आई और पूरी फसल तबाह हो गई, तो बीमा कंपनी ने नुकसान का आकलन किए बिना केवल प्रीमियम की राशि वापस कर दी। यह न केवल किसानों के साथ अन्याय है, बल्कि फसल बीमा योजना की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है।

मुख्यमंत्री ने किया था स्थलीय निरीक्षण
उन्होंने पत्र में यह भी याद दिलाया कि पूरे क्षेत्र ने भीषण आपदा का दंश झेला था। स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थलीय निरीक्षण किया गया था और आपदा से हुई क्षति का अवलोकन भी किया गया। ऐसे में यह मानना स्वाभाविक है कि उस स्थिति में आलू की फसल का बच पाना असंभव था। इसके बावजूद बीमा क्लेम न मिलना किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
किसानों में रोष, योजना पर उठे सवाल
बीमा योजना के तहत आलू फसल का क्लेम न मिलना क्षेत्र के किसानों में भारी रोष का कारण बना हुआ है। किसानों का कहना है कि अगर आपदा में भी बीमा सुरक्षा नहीं मिलेगी तो योजना का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?
जांच और भुगतान की मांग
जिला पंचायत सदस्य बिना चौहान ने कृषि मंत्री से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित विभाग और बीमा कंपनी से स्पष्ट जानकारी लेकर किसानों को उनके वास्तविक नुकसान के अनुरूप उचित दिलाया जाए।
सवाल जो सत्ता संवाद पूछता है सिस्टम से
-जब फसल पूरी तरह नष्ट हुई तो बीमा क्लेम क्यों नहीं मिला?
-क्या बीमा कंपनी ने मौके पर नुकसान का आकलन किया?
-मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बावजूद किसानों की क्षति को क्यों नजरअंदाज किया गया?
-फसल बीमा योजना आखिर किसानों के लिए है या सिर्फ कागज़ों के लिए?
आलू पर निर्भर किसान, दोहरी मार के शिकार
गौरतलब है कि कुथनौर वार्ड के किसान पूरी तरह से आलू की फसल पर निर्भर हैं। बीते वर्षों से कभी आपदा तो कभी मौसम की मार के चलते फसल बर्बाद हो रही है। ऐसे में बीमा योजना से भी उचित मुआवजा न मिलना यह साफ दर्शाता है कि किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं।
