फतेहपुर जिले के हथगाम थाना क्षेत्र के अखरी गांव में हुए तिहरे हत्याकांड ने पूरे जिले को दहला दिया है। एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या ने गांव में डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। हत्या के पीछे पुरानी रंजिश बताई जा रही है जो सालों से दोनों परिवारों के बीच चली आ रही थी। इस बार विवाद इतना बढ़ गया कि गोलीबारी के बाद डंडों से शवों को पीटकर हत्यारों ने अपनी नफरत उतारी।
खेत और रास्ते को लेकर चल रहा था पुराना झगड़ा
मृतक पप्पू सिंह का घर मुन्नू सिंह के खेत के ठीक बगल में है। दोनों के बीच पहले भी कई बार रास्ते और खेत के इस्तेमाल को लेकर झगड़ा हो चुका था। ग्रामीणों के अनुसार अकसर आते-जाते टकराव की स्थिति बनती थी और लोग कहते थे कि एक दिन यह झगड़ा खूनखराबे में बदल सकता है। पप्पू सिंह और मुन्नू सिंह के परिवारों के बीच तनाव वर्षों से चला आ रहा था।
गोली चलने से पहले हुई गाली-गलौज और लाठीचार्ज
घटना वाले दिन मुन्नू सिंह का बेटा पीयूष एक ट्रैक्टर से गेहूं की बोरियां लेने जा रहा था। इसी दौरान पप्पू सिंह उसे घूरते हुए दिखा। दोनों में गाली-गलौज हुई और पीयूष ने ट्रैक्टर आगे बढ़ा दिया। पप्पू सिंह लाठी लेकर उसके पीछे दौड़ा और ट्रैक्टर रुकवा लिया। इसी दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने लोगों को फोन कर बुला लिया। जब मारपीट शुरू हुई तो मुन्नू सिंह को सिर में लाठी लगी और वह गिर गया। इसके बाद उसके साथियों ने पप्पू पक्ष पर गोलियां बरसा दीं।
ताबड़तोड़ गोलियों से मारे गए तीनों लोग
हमले में पप्पू सिंह, उनका बेटा अभय और भाई अनूप गंभीर रूप से घायल हो गए। तीनों को पास से गोलियां मारी गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गोली मारने के बाद आरोपियों ने डंडों से शवों को पीटना शुरू कर दिया। पप्पू सिंह को इतने जोर से मारा गया कि डंडा खून से पूरी तरह लाल हो गया था। पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ कि पप्पू सिंह के शरीर पर पांच गोलियां लगी थीं। उनके शरीर से 312 और 32 बोर की गोलियों के छर्रे भी निकले हैं।
मौत के बाद भी नहीं छोड़ा शवों को
गांव के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जब तीनों जमीन पर गिर चुके थे, तब भी आरोपियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने शवों पर डंडे बरसाए। पप्पू सिंह को लाठी से तब तक मारा गया जब तक डंडा खून से सना नहीं गया। यह सब कुछ दिनदहाड़े और ग्रामीणों की आंखों के सामने हुआ, जिससे पूरा गांव सहम गया।
पुरानी पीढ़ी से शुरू हुई दुश्मनी, नई पीढ़ी तक पहुंची
इस दुश्मनी की शुरुआत सिर्फ आज या कुछ महीनों पहले नहीं हुई थी। पप्पू सिंह के पिता लाल बहादुर सिंह और मुन्नू सिंह के पिता के बीच भी पहले से झगड़े होते रहे हैं। कभी गाली-गलौज तो कभी मारपीट तक बात पहुंचती थी, लेकिन फिर भी कभी-कभी साथ बैठकर खाना भी खा लेते थे। नई पीढ़ी ने इस विवाद को खत्म करने के बजाय और गहरा कर दिया, जिसका नतीजा यह खौफनाक हत्या बन गई।
एफआईआर दर्ज, तीन गिरफ्तार, दस टीमें गठित
हत्या के बाद मृतक अनूप की पत्नी मनीषा सिंह ने पुलिस को तहरीर दी, जिसमें पूर्व प्रधान सुरेश सिंह उर्फ मुन्नू, उनके बेटे पीयूष सहित छह लोगों को नामजद किया गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी की गिरफ्तारी के लिए 10 विशेष टीमें बनाई गई हैं। पुलिस का दावा है कि सभी आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
स्कॉर्पियो से भाग निकले थे हमलावर
ग्रामीणों ने बताया कि हमलावर पहले से ट्रैक्टर लेकर रमेश नाम के किसान के नलकूप के पास छिपे थे। जैसे ही पप्पू सिंह, उनका बेटा अभय और भाई अनूप खेत की तरफ बढ़े, घात लगाए बैठे मुन्नू सिंह, पीयूष, भूपेंद्र, सज्जन, विवेक और जान उर्फ विपुल ने उन पर हमला कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी स्कॉर्पियो से भाग निकले।
चार घंटे तक नहीं उठने दिए गए शव
घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने शव उठाने से मना कर दिया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की गई। एसपी धवल जायसवाल ने ग्रामीणों को समझाया और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। घटनास्थल पर एडीजी भानु भास्कर और आईजी प्रेम कुमार ने भी पहुंचकर जांच की।
राजनीतिक चुप्पी पर उठे सवाल
विनोद सिंह भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के जिला उपाध्यक्ष थे, इसके बावजूद किसी राजनीतिक दल की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि केवल वोट मांगने आते हैं, लेकिन जब मदद की ज़रूरत हो तो कोई नहीं आता।
पुलिस पर भारी जिम्मेदारी
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस प्रशासन आरोपियों को कब तक पकड़ पाता है। जिस तरह से यह घटना दिनदहाड़े हुई और जिस निर्ममता से हत्याएं की गईं, उसने पुलिस की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार को अब एक ही आस है—न्याय।









