देहरादून। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण में आयोजित धामी सरकार के अंतिम बजट सत्र के दौरान नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने कई महत्वपूर्ण रिपोर्टे प्रस्तुत की। इन रिपोर्टो को एक-एक कर सत्ता संवाद आप पाठकों के बीच ने लेकर आ रहा है। पहली श्रृंखला के तहत सत्ता संवाद ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पर आधारित रिपोर्ट को आपके सामने लाया है।
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा VB-GRAMG बिल पारित कर मनरेगा के तहत रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। राज्य सरकार ने भी इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। लेकिन मनरेगा में जमीनी हकीकत CAG की रिपोर्ट में कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आई।
रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य आए सामने
CAG द्वारा 2019 से 2024 की अवधि के लिए प्रस्तुत रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य के 6.54 लाख परिवारों को औसतन केवल 21 दिनों का ही रोजगार मिल पाया। यह आंकड़ा योजना के उद्देश्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 39% जॉब कार्ड बिना फोटोग्राफ के पाए गए। 25% जॉब कार्ड में कार्य की तिथि और विवरण दर्ज नहीं था। केवल 4% परिवारों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल सका। कई जॉब कार्ड धारकों को आवेदन के बावजूद काम नहीं मिला।
जिलों में 100 दिन का रोजगार पाने वालों की स्थिति
- अल्मोड़ा: 97,923 में से 1,359
- बागेश्वर: 47,173 में से 1,196
- चमोली: 76,876 में से 1,836
- चंपावत: 38,206 में से 1,858
- देहरादून: 65,586 में से 3,357
- हरिद्वार: 1,50,518 में से 983
- नैनीताल: 59,558 में से 1,001
- पौड़ी गढ़वाल: 1,02,828 में से 1,558
- पिथौरागढ़: 73,671 में से 2,997
- रुद्रप्रयाग: 50,074 में से 2,549
- टिहरी गढ़वाल: 1,50,545 में से 2,192
- उधम सिंह नगर: 1,08,473 में से 1,351
- उत्तरकाशी: 86,001 में से 5,139
रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच केवल 4% पंजीकृत परिवारों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल सका। यह आंकड़ा न केवल योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ग्रामीण रोजगार की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करता है। हालांकि VB-GRAMG योजना के तहत लोगों को अब 125 दिन की काम की गारंटी के तहत कितने दिन का रोजगार मिल पाएगा यह भविष्य के गर्भ में है। लेकिन एक बात तथ्य है यदि कार्यों के क्रियान्वयन पर ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति ऐसे ही रह सकती है।
सत्ता संवाद आगे भी इस श्रृंखला में CAG की अन्य रिपोर्टों का विश्लेषण आप पाठकों तक पहुंचाएगा।











