देहरादून। उत्तराखंड में आफत की बारिश ने एक बार फिर जनजीवन को बेहाल कर दिया है। पहाड़ों पर कहर बनकर बरसे बादलों ने गांव-गांव में तबाही मचाई है। कई इलाके जहां मानचित्र से मिटते नजर आ रहे हैं, वहीं कई अब भी खतरे की जद में हैं।
उत्तरकाशी ज़िले का स्यानाचट्टी यमुनोत्री धाम का अहम पड़ाव अब संकट के मुहाने पर खड़ा है। झील जैसे हालातों ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे स्थानीय लोगों में डर और बेचैनी गहराती जा रही है।
हालांकि, आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन का दावा है कि स्यानाचट्टी में कोई झील नहीं बनी है। उनके अनुसार, कुपड़ा खड़ से आया मलबा यमुना नदी के मुहाने पर जमा हो गया, जिससे पानी का बहाव बाधित हुआ है। इस जमा हुए मलबे (आईबीएम) की ऊंचाई करीब 20 से 25 फीट तक पहुंच गई है। प्रशासन लगातार इसे हटाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बढ़ता जलस्तर मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
सबसे बड़ा खतरा स्यानाचट्टी को जोड़ने वाले एकमात्र पुल पर मंडरा रहा है। अगर यह पुल बहा, तो 15 से 20 गांवों का संपर्क मुख्य बाजार बड़कोट से पूरी तरह कट जाएगा। ऐसे में सवाल ये है कि क्या प्रशासन वक्त रहते हालात पर काबू पा पाएगा?










