देहरादून: उत्तराखंड बीजेपी के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा है। यह संकेत पार्टी नेताओं के हालिया बयानों से मिल रहा है। पहले भी कई वरिष्ठ नेता संगठन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं, और अब गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी के बयान ने इस चर्चा को एक बार फिर तेज कर दिया है।
सांसद अनिल बलूनी ने पासपोर्ट ऑफिस के मुद्दे पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि जिस पासपोर्ट कार्यालय को खुलवाने के लिए उन्होंने पूरा जोर लगाया, वह अभी भी सिर्फ एक साइन के कारण अटका हुआ है। इसका कारण वह स्वयं पता कर रहे हैं। उनका यह बयान अंदरूनी मतभेदों की तरफ इशारा करता दिखाई दे रहा है।
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व कैबिनेट मंत्री विशन सिंह चुफाल, विधायक अरविंद पांडे और मुन्ना सिंह चौहान भी कई बार सवाल उठा चुके हैं। इन बयानों ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को असहज स्थिति में ला दिया है।

उधर, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बलूनी के बयान से दूरी बनाते हुए कहा कि यह बयान किस संदर्भ में दिया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी सांसद खुद ही दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार जनहित की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

बीजेपी के इस अंदरूनी कलह पर कांग्रेस ने भी तंज कसने का मौका नहीं गंवाया। कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि डबल इंजन की सरकार दो अलग-अलग दिशाओं में चल रही है। सांसद खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, पार्टी के भीतर कई नेताओं के बयानों से इतना तो साफ है कि उत्तराखंड बीजेपी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। हालांकि अंदरूनी कलह की वजह क्या है, इस पर हमारे पास कोई प्रमाण नहीं है।
