
पहाड़ों में भूस्खलन और बोल्डर गिरने से सड़कें बार-बार हो रहीं बाधित, मैदान में जलभराव का संकट; JCB और मशीनों से मलबा हटाने का काम जारी
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की बारिश ने एक बार फिर पहाड़ से मैदान तक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 23 अगस्त को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए हुए हैं और कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। लगातार बारिश के बीच भूस्खलन, बोल्डर और मलबा गिरने की घटनाओं से सड़क संपर्क प्रभावित है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 80 मार्ग बंद हैं, जबकि कई स्थानों पर बंद सड़कों को खोलने का काम लगातार जारी है।
7 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र ने 23 अगस्त को देहरादून, टिहरी, पिथौरागढ़, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी और बागेश्वर के कुछ इलाकों में गरज-चमक और बिजली के साथ भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। अन्य जिलों में भी बारिश के तेज दौर की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में भी बारिश से पूरी तरह राहत मिलने के आसार कम हैं। ऐसे में पहले से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरोध का खतरा बना हुआ है।
80 मार्ग बंद, सड़क खोलने का अभियान जारी
लगातार बारिश का सबसे बड़ा असर उत्तराखंड के सड़क नेटवर्क पर दिखाई दे रहा है। भूस्खलन और पहाड़ियों से गिर रहे मलबे के कारण राज्य में 80 मार्ग बंद बताए गए हैं।
कई स्थानों पर सड़क पर अचानक मलबा और बड़े पत्थर आने से यातायात रोकना पड़ रहा है। संबंधित विभाग मशीनों और जेसीबी की मदद से रास्ते साफ करने में जुटे हैं। लेकिन बारिश दोबारा होने पर कई स्थानों पर साफ किए गए मार्ग फिर बाधित होने का खतरा बना हुआ है।
यही वजह है कि इस समय चुनौती केवल सड़क खोलने की नहीं, बल्कि संवेदनशील स्थानों पर दोबारा मलबा और बोल्डर गिरने से रोकने की भी है।
मसूरी-देहरादून मार्ग पर फिर आया मलबा
बारिश से सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले मार्गों में मसूरी-देहरादून रोड भी शामिल है। 22 अगस्त को इस मार्ग पर फिर पहाड़ी का मलबा सड़क पर आ गया था, जिसके कारण कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। प्रशासन ने बाद में आवाजाही शुरू कराई, लेकिन बड़े और भारी वाहनों पर रोक लगाई गई।
लगातार बारिश के कारण ऐसे संवेदनशील मार्गों पर सफर करने वालों के लिए खतरा बना हुआ है। सड़क खुलने के बाद भी पहाड़ी से दोबारा मलबा गिरने की आशंका बनी रहती है।
पहाड़ में बोल्डर और भूस्खलन, मैदान में जलभराव
उत्तराखंड में बारिश का असर केवल पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। पहाड़ों में जहां भूस्खलन, बोल्डर और सड़क धंसने की समस्या सामने आ रही है, वहीं मैदानी इलाकों में भारी बारिश के बाद जलभराव और निचले इलाकों में पानी जमा होने की स्थिति चिंता बढ़ा रही है।
इसका सीधा असर रोजमर्रा की आवाजाही, स्थानीय बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों के संपर्क पर पड़ रहा है। कई जगह ग्रामीणों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
20 अगस्त से लगातार बदल रही है सड़क बंद होने की स्थिति
पिछले कुछ दिनों की तस्वीर बताती है कि सड़क अवरोध लगातार बदल रहे हैं। कहीं मलबा हटाकर मार्ग खोल दिया जाता है तो दूसरे स्थान पर बारिश के नए दौर के बाद फिर सड़क बंद हो जाती है।
यही कारण है कि अलग-अलग दिनों में सामने आए सड़क बंद होने के आंकड़ों को जोड़कर कोई कुल संख्या निकालना सही नहीं होगा। 23 अगस्त की ताजा स्थिति में 80 मार्ग बंद हैं, जबकि इससे पहले की रिपोर्टों में बंद मार्गों की संख्या इससे अधिक रही थी।
इससे साफ है कि स्थिति स्थिर नहीं है और बारिश के प्रत्येक नए दौर के साथ सड़क नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है।
अगले 24 से 48 घंटे क्यों महत्वपूर्ण?
आज की सबसे बड़ी चिंता यही है कि बारिश का दौर अभी समाप्त नहीं हुआ है। IMD के जिला पूर्वानुमान में 23 अगस्त को देहरादून, नैनीताल और बागेश्वर समेत कई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना दर्ज की गई है। साथ ही गरज और बिजली चमकने की स्थिति भी बन सकती है।
इसका मतलब है कि संवेदनशील पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन, बोल्डर गिरने और अचानक मार्ग बाधित होने का खतरा अगले कुछ दिनों तक बना रहेगा।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ बंद मार्गों को जल्द से जल्द खोलना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ मशीनों और कर्मचारियों को ऐसे स्थानों पर काम करना पड़ रहा है जहां पहाड़ी से लगातार मलबा गिरने का खतरा है।
बारिश के बीच सड़क बहाली का काम अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। कई स्थानों पर केवल मलबा हटाना पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि सड़क की सुरक्षा दीवार, पुश्ता या सड़क का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।
यही वजह है कि आने वाले दिनों में सिर्फ यह देखना महत्वपूर्ण नहीं होगा कि कितनी सड़कें खुलीं, बल्कि यह भी देखना होगा कि कितने मार्ग दोबारा बंद हुए और किन संवेदनशील स्थानों पर स्थायी सुरक्षा कार्य की जरूरत है।
फिलहाल उत्तराखंड की तस्वीर
उत्तराखंड में बारिश ने पहाड़ और मैदान दोनों को प्रभावित किया है। 80 बंद मार्ग, लगातार भूस्खलन, सड़क पर गिरते बोल्डर और कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट इस समय सबसे बड़ी चिंता हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट देखते हुए अगले 24 से 48 घंटे खास तौर पर महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वालों को निकलने से पहले सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी लेना जरूरी होगा।
