देहरादून: राजधानी देहरादून के रायपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत खलंगा इलाके में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। भू-माफिया ने यहां रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र की लगभग 40 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा कर बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी और गेट लगाकर उसे अपनी संपत्ति बताने लगा। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब स्थानीय नागरिकों ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल की, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।

स्थानीय निवासी दीपशिखा रावत ने बताया कि वह रोज की तरह मॉर्निंग वॉक पर निकली थीं, तभी देखा कि कुछ लोग जंगल में तारबंदी कर रहे हैं। पूछताछ करने पर एक व्यक्ति ने खुद को अनिल शर्मा, निवासी गुड़गांव बताया और दावा किया कि यह जमीन अशोक अग्रवाल की है।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन पहले तो उन्होंने भी यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि यह भूमि वन विभाग की नहीं है। हालांकि, जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो मामला तूल पकड़ गया।

इस घटना के बाद मूल निवासी बुक कानून समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले रायपुर के विधायक उमेश शर्मा को भी इस स्थान पर देखा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमाफिया की नजर अब खेत-खलिहान से हटकर जंगलों पर जा चुकी है और यह बेहद गंभीर मामला है।

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता विकेश नेगी ने बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। कि वन विभाग की जमीनें नाले-खाले व बंजर भूमि पर है जिस पर वन विभाग का कब्जा नहीं है। जबकि वास्तव में यह रिजर्व फॉरेस्ट एरिया है। यदि जांच निष्पक्ष रूप से हुई, तो भू-माफिया को जेल की सलाखों के पीछे जाने से कोई नहीं रोक सकता।

घटना के गंभीरता को देखते हुए डीएफओ स्वयं वन विभाग की टीम के साथ निरीक्षण पर पहुंचे। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कब्जाधारी के पास कोई वैध अनुमति नहीं है और यह जमीन वन क्षेत्र में आती है। उन्होंने यह भी माना कि कब्जे के दौरान कई पेड़ों को काटा गया है। वन विभाग ने एक विशेष जांच समिति गठित कर क्षति का आकलन शुरू कर दिया है, और जल्द ही FIR दर्ज करने की बात की है।
बड़ा सवाल: वन विभाग की आंखें कब खुलेंगी?
इस घटना ने न सिर्फ वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि यदि राजधानी देहरादून के जंगलों में भू-माफिया इतना सक्रिय हो सकता है, तो दूर-दराज के इलाकों का क्या हाल होगा? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी सख्त कार्रवाई करता है और जंगलों को माफिया के कब्जे से कैसे मुक्त कराता है।










